सुल्तानपुर लोकसभा चुनाव 2024: मेनका गांधी के सामने सपा की चुनौती, बीएसपी बिगाड़ेगी खेल?

उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर आगामी चुनावी मुकाबला काफी रोचक होने वाला है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से मेनका गांधी एक बार फिर मैदान में हैं और वे यहां से दूसरी बार चुनाव लड़ रही हैं। उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी राम भुआल निषाद से है, जो पहले भाजपा में थे और उससे पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में थे। राम भुआल दो बार विधायक और बीएसपी सरकार में राज्यमंत्री भी रह चुके हैं।

उम्मीदवारों की स्थिति

सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर कुल 9 प्रत्याशी मैदान में हैंबसपा ने उदराज वर्मा को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा, दो निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं। इस सीट पर छठे चरण में 25 मई को वोटिंग होगी

मेनका गांधी अपने पशु प्रेम और नरेंद्र मोदी की गारंटी के साथ चुनावी समर में हैं, जबकि सपा और बसपा जाति-बिरादरी के दम पर ताल ठोक रही हैं।

सुल्तानपुर लोकसभा सीट की खासियत

सुल्तानपुर लोकसभा क्षेत्र अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी जैसे धार्मिक शहरों के केंद्र में स्थित है। इस सीट की एक खास बात यह है कि भाजपा के देवेंद्र बहादुर को छोड़कर कोई और नेता यहां से दोबारा नहीं चुना गया। इसलिए इस सीट पर कभी किसी एक नेता का दबदबा नहीं रहा है। अब देखना होगा कि मेनका गांधी देवेंद्र बहादुर के इतिहास को दोहरा पाती हैं या नहीं।

पिछले चुनावों का विश्लेषण

2019 के लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी ने बसपा के चंद्र भद्र सिंह को 14,526 वोटों से हराया था। मेनका गांधी को 4,59,196 वोट मिले थे जबकि चंद्र भद्र सिंह को 4,44,670 वोट मिले थे। कांग्रेस के डॉ. संजय सिंह महज 41 हजार वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थे।

2014 के चुनाव में मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी यहां से सांसद चुने गए थे। वरुण ने बसपा के पवन पांडेय को 1,78,902 वोटों से हराया था। उस समय सपा के शकील अहमद तीसरे और कांग्रेस की अमीता सिंह चौथे स्थान पर थीं।

2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के डॉ. संजय सिंह विजयी हुए थे। बसपा के मोहम्मद ताहिर दूसरे स्थान पर थे। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सूर्यभान सिंह 44 हजार वोटों के साथ चौथे स्थान पर थे।

बसपा की चुनौती

पिछले तीन चुनावों में बसपा लगातार दूसरे स्थान पर रही है। कांग्रेस और सपा का गठबंधन मेनका गांधी के लिए चुनौती बन सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा-कांग्रेस का गठबंधन इस बार मेनका गांधी के विजयी रथ को रोक सकता है।

विधानसभा सीटों की स्थिति

सुल्तानपुर लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा सीटें आती हैं: इसौली, सुल्तानपुर, सुल्तानपुर सदर, कादीपुर और लम्भुआ। इनमें इसौली सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है जबकि बाकी चार सीटों पर भाजपा का दबदबा है।

सुल्तानपुर लोकसभा चुनाव 2024: महत्वपूर्ण विवरण

मुद्दाविवरण
भाजपा उम्मीदवारमेनका गांधी
सपा उम्मीदवारराम भुआल निषाद
बसपा उम्मीदवारउदराज वर्मा
अन्य उम्मीदवार2 निर्दलीय उम्मीदवार
वोटिंग की तारीख25 मई 2024
मेनका गांधी का बैकग्राउंडपशु प्रेम के लिए जानी जाती हैं, नरेंद्र मोदी की गारंटी के साथ चुनावी मैदान में
राम भुआल निषाद का बैकग्राउंडपूर्व में भाजपा और बसपा में थे, दो बार विधायक और बसपा सरकार में राज्यमंत्री रह चुके हैं
पिछला चुनाव (2019)मेनका गांधी ने बसपा के चंद्र भद्र सिंह को 14,526 वोटों से हराया
मेनका गांधी के वोट (2019)4,59,196 वोट
बसपा के चंद्र भद्र सिंह के वोट (2019)4,44,670 वोट
कांग्रेस के डॉ. संजय सिंह (2019)41,000 वोट (तीसरे स्थान पर)
पिछला चुनाव (2014)वरुण गांधी ने बसपा के पवन पांडेय को 1,78,902 वोटों से हराया
कांग्रेस की स्थिति (2014)अमीता सिंह चौथे स्थान पर
विधानसभा सीटेंइसौली (सपा), सुल्तानपुर, सुल्तानपुर सदर, कादीपुर और लम्भुआ (सभी भाजपा के कब्जे में)
लोकसभा सीट की खासियतभाजपा के देवेंद्र बहादुर को छोड़कर कोई नेता यहां से दोबारा नहीं चुना गया
राजनीतिक चुनौतीसपा और बसपा जाति-बिरादरी के दम पर चुनाव लड़ रही हैं, कांग्रेस और सपा गठबंधन से भाजपा को चुनौती

निष्कर्ष

सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर इस बार का चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प है। मेनका गांधी के सामने सपा और बसपा की चुनौती है। राम भुआल निषाद के भाजपा और बसपा के पुराने अनुभव उन्हें एक मजबूत प्रत्याशी बनाते हैं। बसपा के उदराज वर्मा और दो निर्दलीय उम्मीदवार भी मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकते हैं।

चुनावी समर में सभी दल अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं। भाजपा अपने मजबूत संगठन और मेनका गांधी के जनाधार पर भरोसा कर रही है, जबकि सपा और बसपा जाति-बिरादरी की राजनीति के दम पर ताल ठोक रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है और सुल्तानपुर का राजनीतिक भविष्य किस दिशा में जाता है।

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