लोकसभा चुनाव 2024: यूपी की वो 8 सीटें जहां नहीं चलती मोदी लहर, बीजेपी के लिए चुनौती बरकरार

पूर्वांचल में बीजेपी का संघर्ष

लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल इलाका बीजेपी के लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। 2019 के लोकसभा चुनावों में यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर भी पूरी तरह असर नहीं दिखा सकी थी और बीजेपी को 5 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। इस बार भी बीजेपी के लिए यह क्षेत्र आसान नहीं दिख रहा है।

जौनपुर लोकसभा सीट

जौनपुर लोकसभा सीट से 2019 में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। इस सीट से बहुजन समाज पार्टी के श्याम सिंह यादव ने जीत हासिल की थी। 1989 से 2014 के बीच बीजेपी ने यहां से चार बार लोकसभा का चुनाव जीता था। इस बार बीजेपी ने मुंबई में पूर्वांचल के लोकप्रिय नेता कृपाशंकर सिंह पर दांव खेला है। उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी के बाबू सिंह कुशवाहा से है, जो अतिपिछड़ों के कद्दावर नेता माने जाते हैं।

घोसी लोकसभा सीट

पिछले चुनाव में घोसी लोकसभा सीट पर बहुजन समाज पार्टी के अतुल राय ने चुनाव जीता था। इस बार समाजवादी पार्टी से राजीव राय और बहुजन समाज पार्टी से बालकृष्ण चौहान उम्मीदवार हैं। एनडीए ने यहां से सुभासपा के अनिल राजभर को उम्मीदवार बनाया है, जो सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के बेटे हैं।

गाजीपुर लोकसभा सीट

गाजीपुर लोकसभा सीट से 2019 का आम चुनाव बहुजन समाज पार्टी के अफजाल अंसारी ने जीता था। इस बार बीजेपी ने मनोज सिन्हा के खास पारस नाथ राय को उम्मीदवार बनाया है। मनोज सिन्हा जब से कश्मीर के राज्यपाल बने हैं, तब से उनके नाम और काम की काफी चर्चा है।

आजमगढ़ लोकसभा सीट

2019 के आम चुनाव में आजमगढ़ सीट से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ढाई लाख से ज्यादा मतों से जीत हासिल की थी। हालांकि अखिलेश के इस्तीफे के बाद हुए उपचुनाव में उनके भाई धर्मेंद्र यादव को करारी हार मिली और बीजेपी के दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को जीत मिली थी। इस बार यहां मुकाबला और भी दिलचस्प हो सकता है।

लालगंज लोकसभा सीट

लालगंज सीट सुरक्षित सीट है। 2014 में इस सीट से बीजेपी की नीलम सोनकर ने जीत हासिल की थी। पर 2019 में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने मिलकर यह सीट बीजेपी से छीन ली थी। इस बार बीजेपी ने फिर से नीलम सोनकर पर ही भरोसा जताया है। बीएसपी ने यहां से डॉक्टर इंदू चौधरी को मैदान में उतारा है और समाजवादी पार्टी ने दरोगा सरोज पर भरोसा जताया है।

चंदौली लोकसभा सीट

पिछली बार बीजेपी ने पूर्वांचल की चंदौली लोकसभा सीट पर जीत हासिल की थी, लेकिन अंतर ज्यादा नहीं था। बीजेपी के डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय महज 13,959 मत से जीते थे। इस बार मुकाबला बेहद कड़ा है। समाजवादी पार्टी ने यहां से वीरेंद्र सिंह को टिकट दिया है और बहुजन समाज पार्टी ने सतेंद्र कुमार मौर्य को उम्मीदवार बनाया है।

मछली शहर लोकसभा सीट

यूपी में मछली शहर लोकसभा सीट पर बीजेपी ने पिछले चुनाव में महज 181 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। बीजेपी ने मौजूदा सांसद बीपी सरोज को उम्मीदवार बनाया है। बीपी सरोज के पास जीत की हैट्रिक बनाने का मौका है।

बलिया लोकसभा सीट

बलिया में 2019 का चुनाव बीजेपी के वीरेंद्र सिंह मस्त ने मात्र 15,519 वोट से जीता था। इस बार बीजेपी ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर को उम्मीदवार बनाया है। उनके सामने सपा के सनातन पांडेय और बीएसपी के ललन सिंह यादव मैदान में हैं।

निष्कर्ष

पूर्वांचल की आठ लोकसभा सीटें बीजेपी के लिए इस बार भी चुनौती बनी हुई हैं। 2019 के चुनावों में यहां पार्टी को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी और कुछ सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। इस बार भी बीजेपी को यहां जीत हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। क्षेत्रीय मुद्दे, जातिगत समीकरण और स्थानीय नेताओं का प्रभाव इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बीजेपी के सामने इस बार भी पूर्वांचल में कड़ी चुनौती है, जहां मोदी लहर का असर सीमित दिखता है।

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