40 साल में पहली बार घर-घर वोट मांगने निकली मुख्तार अंसारी परिवार की महिलाएं

गाजीपुर में चुनावी जंग

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर संसदीय क्षेत्र में इस बार के लोकसभा चुनाव में कुछ अनोखा हो रहा है। मुख्तार अंसारी के परिवार की महिलाएं, जो आमतौर पर सार्वजनिक जीवन से दूर रहती थीं, अब घर-घर जाकर वोट मांग रही हैं। इस बार सपा के टिकट पर अफजाल अंसारी चुनाव मैदान में हैं, जबकि भाजपा से पारसनाथ राय और बसपा से डॉ. उमेश सिंह भी उम्मीदवार हैं।

नूरिया अंसारी परिवार की सक्रियता

गाजीपुर के संकरा गांव की दलित बस्ती में पीले सलवार सूट और दुपट्टे में नूरिया अंसारी, अफजाल अंसारी की बेटी, मतदाताओं को भाजपा की कमियां बता रही हैं और एकजुट होकर वोट करने की अपील कर रही हैं। यह पहली बार है जब अंसारी परिवार की महिलाएं अपने राजनीतिक वजूद को बचाने के लिए घर-घर जाकर वोट मांग रही हैं।

वंचित वर्गों पर जोर

मुख्तार अंसारी के जीवनकाल में जो लोग दबाव में उनकी हां में हां मिलाते थे, अब उनके निधन के बाद उनका व्यवहार बदल गया है। अंसारी परिवार को यह अहसास है और इसलिए वे वंचित वर्गों के परिवारों के बीच जाकर वोट मांग रहे हैं। भूमिहार, ठाकुर और ब्राह्मण परिवारों में उनकी उपस्थिति बहुत कम है।

मोदी सरकार की योजनाओं पर सवाल

नूरिया अंसारी अपने पिता के लिए वोट मांगते हुए भाजपा की कमियों पर जोर देती हैं। वह नरेंद्र मोदी सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाती हैं, पूंजीवाद और सामंतवाद की बात करती हैं, और महंगाई बढ़ने का मुद्दा उठाती हैं। नूरिया महिलाओं से कहती हैं कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव उनके भविष्य के लिए लड़ रहे हैं।

सपा का उम्मीदवार अफजाल अंसारी

सपा ने इस बार भी अफजाल अंसारी को टिकट दिया है। वे 2019 में भी जीते थे। भाजपा ने स्कूल संचालक पारस नाथ राय को उम्मीदवार बनाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्तार अंसारी की मौत के बाद परिवार का दबदबा कम हुआ है, लेकिन माफिया शब्द का उपयोग विभिन्न नजरियों पर निर्भर करता है।

चुनाव के मुद्दे और भाजपा पर हमला

तेजस्वी यादव की तरह, नूरिया अंसारी भी बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर वोट मांग रही हैं। उनका कहना है कि भाजपा के किसी नेता ने बिहार की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। वे मोदी सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाती हैं और कहती हैं कि महंगाई बढ़ी है।

राजभर समुदाय का समर्थन

इस बार भाजपा ने ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन किया है। इस क्षेत्र में राजभर समुदाय की संख्या अच्छी खासी है और ओमप्रकाश की मजबूत पकड़ है। पिछले विधानसभा चुनाव में इसका प्रदर्शन भी वह कर चुके हैं।

पारसनाथ राय का जनाधार

पारसनाथ राय का सादात क्षेत्र में लंबा समय विद्यालय प्रबंधन और संचालन में बीता है, जिससे उन्हें स्थानीयता का लाभ मिल सकता है। ठाकुर समुदाय की बहुलता वाले इस क्षेत्र में भाजपा का अपना जनाधार है, जो उसे चुनावी लड़ाई में मजबूत बना रहा है।

बसपा का उम्मीदवार

बसपा ने इस बार डॉ. उमेश कुमार सिंह को मैदान में उतारा है। उन्हें बिरादरी का समर्थन भी है, लेकिन बसपा के परंपरागत वोटों पर इसका असर पड़ता दिख रहा है और वे दूसरे दलों में जा सकते हैं।

निष्कर्ष

मुख्तार अंसारी के बिना चुनाव लड़ रहे उनके भाई अफजाल के लिए रास्ता आसान नहीं है। भाजपा और सपा के बीच की यह लड़ाई बेहद रोचक होती जा रही है। भाजपा के पारसनाथ राय और सपा के अफजाल अंसारी के बीच मुकाबला है, जिसमें स्थानीयता और समुदायों का समर्थन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आगामी चुनाव परिणाम बताएंगे कि गाजीपुर की जनता ने किस पर विश्वास जताया है और कौन सत्ता में आएगा।

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